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भारत में नव वर्ष या नया साल कब-कब मनाया जाता है?

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भारत की भूमि सदियों से आशा एवं आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत है । हमारी इसी शाश्वत आशा का प्रतीक भारत में मनाये जाने वाले अनेकानेक नव वर्ष भी हैं। ये विविध नव वर्ष चन्द्रमा अथवा सूर्य अथवा दोनों के पथ पर आधारित हैं या फिर किसी क्षेत्र या धर्म द्वारा मान्यता प्राप्त कैलेंडर पर निर्भर हैं या इन सभी के संयोजन से भी तय किए गए हैं। इसके अलावा, भारत में अन्य उत्सवों और त्यौहारों के समान, इन में से अधिकांश नव वर्षों के निर्धारण में ऋतु और कृषि चक्र का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

नवीन वित्तीय वर्ष – अप्रैल १ 

आइये, भारतीय नव वर्षों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने की इस यात्रा का प्रारंभ हम वित्तीय वर्ष से करते हैं जो भारत के समस्त नागरिकों के लिए मान्य है|  ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार १ अप्रैल को प्रशासनिक रूप से भारत में नवीन वित्तीय वर्ष का आगाज़ होता है ।

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मार्च और अप्रैल में मनाये जाने वाले नव वर्ष के पर्व 

लगभग इसी समय मार्च और अप्रैल के महीनों में जब देश के अधिकांश भाग, वसंत ऋतु के मनमोहक रंगों में सराबोर होते हैं,  तब भारत में नववर्ष के दो प्रमुख उत्सव मनाये जाते हैं।

चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को भारत के अनेक क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक , विशेष रूप से हिन्दू धर्मावलम्बी , नूतन वर्ष का पर्व धूम धाम से मनाते हैं| उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में यह शुभ तिथि नव संवत का सूत्रपात करती है| महाराष्ट्र तथा दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेशों में इस पर्व को गुड़ी पड़वा (गुढी पाडवा) के नाम से जाना जाता है; गोवा में यह संसार पड़वा भी है, कश्मीर में यह नवरेह कहा जाता है और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में इसे उगादी अथवा युगादी के रूप में मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चैत्र नवरात्रि का आरम्भ भी होता है और सिन्धी इसी दिन चेटी चंड का त्योहार मनाते हैं|

भारत के कई अन्य क्षेत्रों में १३ अप्रैल, १४ अप्रैल अथवा १५ अप्रैल को नव वर्ष का पर्व हर्ष-उल्लास से मनाया जाता है। इन तारीखों को सिख धर्मावलम्बी एवं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू के लोग बैसाखी या वैसाखी  का उत्सव मनाते हैं| दूसरी ओर, इन दिनों में हिमाचल प्रदेश में बसोआ, उत्तराखंड में बिखौती या विषुवत संक्रांति, तमिलनाडु में पुथंडु, केरल में विषु, तुलु क्षेत्र में बिसु परबा, ओडिशा में बिशुबा या पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में पोइला बैसाख, मिथिला क्षेत्र में जूड़ शीतल, असम में रोंगाली बिहू या बोहाग बिहू, अरुणाचल प्रदेश में सांगकेन और त्रिपुरा में ट्रिंग (टिरीन्ग) का  समय होता है।

साजिबू नोंगमा पनबा या मैतेई चेइराओबा जो मणिपुर के कई समुदायों का चन्द्र नववर्ष उत्सव है तथा मेघालय का सजीव चाड सुकरा भी इसी समय आता है।

पाठकों से अनुरोध है कि वह इस तथ्य पर ध्यान दें कि चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार एक ही दिन पर नहीं पड़ती है। यह संभव है कि कुछ वर्षों में यह अप्रैल के मध्य में दूसरे समूह के साथ पड़ सकती है। अन्य वर्षों में दोनों में कई सप्ताहों का अंतर हो सकता है|

नव वर्ष की संस्कृत में शुभकामनायें 

भारत के अन्य नये साल या नव वर्ष 

हमारी नव वर्षों की चर्चा अभी समाप्त नहीं हुई है|

दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गुजराती नए साल का आगाज़ करते हैं। जैन धर्मावलंबियों का वीर संवत भी इसी दिन प्रारंभ होता है| कच्छ क्षेत्र के लोग आषाढ़ के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन नव वर्ष या आषाढ़ी बीज का स्वागत करते हैं।

ईरानी २१ मार्च को नवरोज़ का जश्न मनाते हैं जबकि शहंशाही कैलेंडर के अनुसार पारसी धर्मावलम्बी अगस्त के मध्य में नए साल का स्वागत करते हैं।

अधिकांश मुसलमान मुहर्रम, यानी के हिजरी कैलंडर के प्रथम महीने के पहले दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं।

तिब्बती बौद्धों और सिक्किम के कई समुदायों के लिए नव वर्ष का आरम्भ लोसर पर्व से होता है| अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर, यह पर्व अलग-अलग दिनों पर मनाया जाता है|  लद्दाख में नए साल का प्रारंभ गलदान नामचोट पर्व से होता है जो आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में पड़ता है । अंगामी नागा सेक्रेनी नाम के १०-दिवसीय वार्षिक शुद्धिकरण उत्सव के दौरान नया साल मनाते हैं| नागालैंड और मिजोरम के कई समुदाय और देश भर के ईसाई ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार १  जनवरी को नया साल मनाते हैं।

भारत के नव वर्षों में विविधता में एकता है 

हम यहाँ यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमने पर्वों का वर्णन करते समय उन्हें केवल सांकेतिक रूप से आमतौर पर प्रचलित रिवाजों के अनुसार राज्यों से जोड़ा है। प्रत्येक राज्य और क्षेत्र में विविध मान्यताएं प्रचलित हैं और हमारा आशय त्योहारों को क्षेत्रीय तौर पर विभक्त करने का तनिक भी नहीं है | हम आपसे क्षमा भी मांगना चाहते हैं क्योंकि हम अपनी उपरोक्त चर्चा में भारत में मनाये जाने वाले सभी नव वर्ष उत्सवों को समाविष्ट नहीं कर पाये हैं तथा वर्तनी, इत्यादि में भी हमसे अवश्य कई बार चूक हुई है|

कल्चरल संवाद की टीम की ओर से प्रत्येक भारतीय को उनके द्वारा मनाए जाने वाले नव वर्ष के पर्व पर अनंत शुभकामनाएँ।

शुभ नव वर्ष|

संपादकीय टिप्पणी: उपरोक्त सूची भारत में नव वर्षों की पूर्ण सूची नहीं है। अगर आपको लगता है कि हमने किसी नए साल के पर्व को सम्मिलित नहीं किया है, तो कृपया हमें [email protected] पर लिखें। अगर आप अपने नव वर्ष के बारे में लिखना चाहते हैं या तस्वीरें शेयर करना चाहते हैं, तो कृपया इसी आईडी का प्रयोग करें। हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

Garima Chaudhry Hiranya Citi Tata Topper

Garima Chaudhry

Garima is a corporate leader and the Founder and Editor of Cultural Samvaad. An Indic Studies enthusiast, she is a guest faculty member at the Mumbai University and K J Somaiya Institute of Dharma Studies among other institutes . Passionate about understanding India’s ancient 'संस्कृति 'or culture, Garima believes that using a unique idiom which is native to our land and her ethos, is the key to bringing sustainable growth and change in India.

In her corporate avataar, Garima runs Hiranya Growth Partners LLP, a boutique consulting and content firm based in Mumbai. She is a business leader with over two decades of experience across Financial Services, Digital Payments and eCommerce, Education and Media at Network18 (Capital18 and Topperlearning), Citibank and TAS (the Tata Group). Garima is an MBA from XLRI, Jamshedpur and an Economics and Statistics Graduate.

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